रात पसरी है मगर तारे जगे बैठे हैं
देख तो, सुबह के हरकारे जगे बैठे हैं ।
देख तो, सुबह के हरकारे जगे बैठे हैं ।
हाँ,आतंक का सन्नाटा नगर पर काबिज़
पर दीवारों पे सुर्ख़ नारे जगे बैठे हैं ।
पर दीवारों पे सुर्ख़ नारे जगे बैठे हैं ।
इधर अलावों में कुछ आग बचाने वाले
रौशनी के कई रखवारे जगे बैठे हैं ।
रौशनी के कई रखवारे जगे बैठे हैं ।
वक़्त आसां नहीं जो चैन से सो लेगा ' कमल'
तेरी चौखट पे भी हत्यारे जगे बैठे हैं ।
तेरी चौखट पे भी हत्यारे जगे बैठे हैं ।
----- आदित्य कमल