संविधान
यह पुस्तक मर चुकी है
इसे मत पढ़ो
इसके लफ़्ज़ों में मौत की ठण्डक है
और एक-एक पन्ना
ज़िन्दगी के अन्तिम पल जैसा भयानक
यह पुस्तक जब बनी थी
तो मैं एक पशु था
सोया हुआ पशु
और जब मैं जागा
तो मेरे इन्सान बनने तक
ये पुस्तक मर चुकी थी
अब अगर इस पुस्तक को पढ़ोगे
तो पशु बन जाओगे
सोए हुए पशु।
(याद है बाबा साहेब अम्बेदकर ने क्या कहा था, संविधान बनाने के 5 वर्ष बाद? उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें मौका मिले तो इसे वो खुद जला देंगे, क्यूंकि अब यह जनता के हित में नहीं रहा! यह जनता विरोधी हो चूका है!
जबकि भगत सिंह और उनके पार्टी HSRA ने स्वतन्त्र भारत के लिए समाजवादी व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसकी अवहेलना की नेहरू, पटेल आदि की कौंग्रेस ने. उसमे गाँधी और मबेदकर का भी हाथ था!)
यह पुस्तक मर चुकी है
इसे मत पढ़ो
इसके लफ़्ज़ों में मौत की ठण्डक है
और एक-एक पन्ना
ज़िन्दगी के अन्तिम पल जैसा भयानक
यह पुस्तक जब बनी थी
तो मैं एक पशु था
सोया हुआ पशु
और जब मैं जागा
तो मेरे इन्सान बनने तक
ये पुस्तक मर चुकी थी
अब अगर इस पुस्तक को पढ़ोगे
तो पशु बन जाओगे
सोए हुए पशु।
(याद है बाबा साहेब अम्बेदकर ने क्या कहा था, संविधान बनाने के 5 वर्ष बाद? उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें मौका मिले तो इसे वो खुद जला देंगे, क्यूंकि अब यह जनता के हित में नहीं रहा! यह जनता विरोधी हो चूका है!
जबकि भगत सिंह और उनके पार्टी HSRA ने स्वतन्त्र भारत के लिए समाजवादी व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसकी अवहेलना की नेहरू, पटेल आदि की कौंग्रेस ने. उसमे गाँधी और मबेदकर का भी हाथ था!)
(अब उस गलती को सुधारा नहीं जा सकता बल्कि एक कज्दूर क्रांति द्वारा ही, इसे विस्थापित कर, एक ऐसे समाज की स्थापना की जा सकती है जो वर्ग विहीन हो, शोषण विहीन हो, जहाँ बेरोजगारी, गरीबी ना हो, मुर्खता और अन्धविश्वाश का स्थान ना हो, आतंकवाद और युद्द ना हो, एक मानव का विकास महामानव में हो सके!)