Thursday, 27 December 2018

स्त्री प्रश्न बनाम क्रांति

देवी ना बनाओ मां, बहन व बेटी को,
मजबूर करो न उसे त्याग करने को! 
बने रहने दो उसे लड़की या औरत,
फिर ही होगी उसकी जिंदगी बेहतर, 
जैसे तुम्हारा लड़का या मर्द रहकर!
जुल्म ना ढाहो शरीर के ताकत से, 
बराबर की हिस्सेदार है काम से, 
उत्पादन में, खेत, खलिहान में,
खान, फैक्टरी में और रसोई में!
सुन रहे हो ना शंखनाद क्रांति का?
उफान है मजदूर-किसानों के मुक्ति का. 
मसल दिए जाऔगे स्त्रियाँ ना आयीं तो!
हर आधे पर हक़ है उनका,
शोषण और प्रतारण में भी!
विद्रोह और संघर्ष में भी.
मजबूत है दुश्मन, धूर्त है,
हर्बो हथियार से लैस है! 
अपनी सेना कमजोर ना करो अहम में, 
जाती-धर्म, स्त्री पुरुष के चक्कर में!!

युद्ध

दीवार पर खड़िया से लिखा था:
वे युद्ध चाहते हैं
जिस आदमी ने यह लिखा था
पहले ही धराशायी हो चुका है। बर्तोल्‍त ब्रेख्‍त