गर मिल जाये जिंदगी दुबारा
Thursday, 29 October 2020
गर मिल जाये जिंदगी दुबारा
हमारे हत्यारे
हमारे हत्यारे
क्यों करें इज्जत औरतों की
क्यों करें इज्जत औरतों की
Sunday, 18 October 2020
ये क्या हो गया?
ये क्या हो गया?
कहां आ गये हम?
कहां आ गये हम?
Sunday, 11 October 2020
हमारे घर में आग लगाया है
हमारे घर में आग लगाया है
हमारे घर में आग लगवाया है
महल वालों के गुंडों ने लगवाया है
लग्गी लगा के दूर से ही जलवाया है
खुद आग से बच जाओगे ऐसा सोचा है?
झोपड़पट्टी को सभ्यता से दूर कर रहे हो
मजदूरों का काम खत्म होते लतिया रहे हो
बेरोजगारों की अनगिनत फौज तो बढ़ा रहे हो
अनजाने ही सही, पर अपनी मौत को बुला रहे हो।
झोपडपट्टियों की कतारें बिछा देंगे
झोपड़ महल के फासले खत्म कर देंगे
हवा का रुख बदल लपटें महलों तक पहूंचा देंगे
हमारा जो भी हो, तुम्हारा भी नामों निशान मिटा देंगे।
बच्चे भगवान के रूप?
बच्चे भगवान के रूप?
बच्चे बच्चे होते हैं
अच्छे अच्छे से होते हैं
कुत्तों के या आदमी के हैं।
स्वस्थ्य हों, पेट भरा हो
तो खेलते और हंसते रहते हैं
प्यारे प्यारे से, लुभावने लगते हैं।
इनकी छोटी सी जरूरत है
भूख और बिमारी से मुक्ती की है
पर पूंजीवाद है, जो इनकी खान है।
भगवान, अल्लाह, गॉड
सारे पूंजीवाद के लिए ही तो हैं
और बिचारे गरीब बच्चों के दुश्मन हैं।
सैनिक
सैनिक
सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य अनुशासन है
सैन्य जीवन एक कठोर कवायद है
कदमताल मरने मारने को तैयार है
क्या सिर्फ देश, समाज के लिए है?
गरीब किसान मजदूर का बच्चा
जीवन को तलाशता हुआ कच्चा
पहुंचा था वो सैनिक भर्ती केंद्र में
निकला रंगरुट वो सैनिक वर्दी में
भटक रहा था रोजी रोटी के लिए
तनख्वाह, जीवन, पेंशन के लिए
कमाने आया था परिवार के लिए
मर गया बिचारा "वतन" के लिए।
लड़ें वह और मुनाफा कमायें दूजे
सैनिक के नाम पर वोट मांगे तीजे
सैनिक स्मारक शिलान्यास करें वो
सैनिक मांगों पर ठेंगा दिखायें वो।
Wednesday, 7 October 2020
सैनिक
सैनिक
कुंठित मन
कुंठित मन
जीवित या मृत, हलचल नहीं
जीवित या मृत, हलचल नहीं