Wednesday, 29 March 2017

सुना है जब से तू आया है 'अपना देश' बदला है

तुम्हारे वास्ते तो आजकल मौसम सुहाना है
हमारी बस्तियाँ उजड़ीं , बिखरता आशियाना है ।
सुना है जब से तू आया है 'अपना देश' बदला है
हमारे घर में आख़िर क्यूँ वही किस्सा पुराना है !
यूँ जी.डी.पी के बढ़ते ग्राफ में उलझा नहीं मुझको
मुझे मालूम है कि किस तरफ बढ़ता खजाना है ।
इधर चौरास्ते पर रोज़ जमघट , भीड़ लगती है
है आँखों को तलाशी काम की , जो बे ठिकाना है ।
तुम्हारी ख़ून की होली-दीवाली , ईद नफ़रत की
असल में आजकल ये ही तेरा कौमी-तराना है ।
समूची दुनिया में कैसी मची ये अफरा-तफरी है
कहीं बारूद के टीले , कहीं पर तोपखाना है ।
तुम्हारी कथनी-करनी का फरक क्या शातिराना है
कि तू तो जंग में भी अम्न का लेता बहाना है !
हमारा शहर अब जगता है हर दिन मातमी धुन पर
वही दस्तूर सब जालिम व क़ातिल, वहशियाना है ।
तू कितना ज़ुल्म कर सकता है , ये हम भी ज़रा देखें
हमें तू आजमा , हमको भी तुझको आजमाना है ।
---- आदित्य कमल

Sunday, 5 March 2017

"झूठ बोलो": बनारस के मेगा शो पर एक कवि की तुकबंदी

बनारस के मेगा शो पर एक कवि की तुकबंदी 
(Kaushal Kishor)

"झूठ बोलो"
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
आंखें नचा-नचा के बोलो
मुंह बिरा-बिरा के बोलो
उनको चिढ़ा-चिढ़ा के बोलो
नजरें चुरा-चुरा के बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
शब्दों को चबा-चबा के बोलो
बातों को रेघा-रेघा के बोलो
किस्से बना-बना के बोलो
सच की हवा उड़ा के बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
राम-राम पे बोलो
गांधी नाम पे बोलो
सबके साथ पे बोलो
विकास राग पे बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
देश में बोलो, विदेश में बोलो
हर भेष में बोलो
सभा में बोलो, सोसायटी में बोलो
हर वेरायटी में बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
नोट पे बोलो, वोट पे बोलो
चाय पे बोलो, वाय पे बोलो
स्ट्राइक पे बोलो, स्कैम पे बोलो
गरीबी पे बोलो, फकीरी पे बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
बन्दर नाई उछल-उछल के बोलो
पतुरिया नाई ठुमक-ठुमक के बोलो
नाचो, गाओ, शोर मचाओ
ड्रम पे बोलो, श्रम पे बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
कमर हिला-हिला के बोलो
सीना फुला-फुला के बोलो
ताली बजा-बजा के बोलो
लहंगा उठा-उठा के बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
आगे से बोलो, पीछे से बोलो
इधर से बोलो, उधर से बोलो
ऊपर से बोलो, नीचे से बोलो
ऐसे बोलो, वैसे बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!
सबसे आगे बढ़कर बोलो
सब पर चढ़कर बोलो
इतना बोलो, उतना बोलो
लहर-लहर लहराकर बोलो
झूठ सब, सबको भरमाए
झूठ सब, सब पर छा जाए
झूठ सब, सच हो जाए
झूठ सब, सच कहलाए
हां, हां बोलो, हां, हां बोलो
झूठ बोलो, झूठ बोलो!