जिंदगी: क्या बकवास है!
लालू आया लालू गया
नीतिश आया नीतिश ना गया
आयाराम आया और आयाराम गया
तेली कल्लू, भुजिया न ही आया न ही गया।
कोई और ना ही आया और ना गया
जनता का न आना हुआ, न जाना हुआ
जहाँ था वहीं पे ठिठुरता और ठहरा सा हुआ
लुटता, शर्माता, और ठगा सा महसूसता हुआ।
प्रजातंत्र और वतन को बचाता हुआ
खुद को सम्विधान की बली पर चढ़ाता हुआ
अगले जन्म में राजकुमार की कल्पना देखता हुआ
इस जन्म, सम्मान और मुर्खता की सुली पर चढ़ गया।