Sunday, 23 July 2017

युद्ध होते नहीं हैं , युद्ध निर्मित किये जाते हैं , युद्ध गढ़े जाते हैं

अमेरिका ने कहा कि भारत और चीन सीधे बातचीत से सीमा विवाद हल करें , भारत की छवि हमेशा से विश्व शांति के लिए प्रतिबद्ध देश की रही है और हम सारी दुनिया को शांति का संदेश देते रहे हैं, लेकिन आज विश्व बाजार और साम्राज्यवाद ही है जो युद्वोन्माद पैदा करने वाली ताकतों को प्रोत्साहित करता है ताकि उसका शोषण जारी रहे!

युद्ध होता है ,
सरकारें नहीं ,सैनिक लड़ते हैं युद्ध ,
राजा नहीं ,प्रजा लडती है युद्ध .
कुछ सैनिक इस देश के मरते हैं ,
कुछ सैनिक उस देश के मरते हैं ,
फिर ,
सुलह होती है ,
समझौता होता है ,
संधि होती है ,
और सब शांत हो जाता है ,
अघटित सा .
…..
लेकिन इतना भर ही नहीं है युद्ध ,
युद्ध बहुत सारे काम करता है ,
युद्ध राजनीति भी करता है ,
युद्ध महंगाई को न्यायोचित ठहराता है ,
युद्ध गड़बड़ाते हुए जनाधार को रोकता है ,
युद्ध गिरती हुई साख को थामता है ,
युद्ध खिसकती हुई कुर्सी को संभालता है ,
युद्ध घोटालों को भुलवा देता है ,
युद्ध जासूसी काण्ड को छुपा देता है ,
युद्ध सुसाइड नोट को दबा देता है ,
युद्ध तड़ीपार को बचा देता है ,
युद्ध ध्यान भटका देता है ,
…..
युद्ध होते नहीं हैं ,
युद्ध निर्मित किये जाते हैं ,
युद्ध गढ़े जाते हैं .
…..
उसके चरित्र की भी परिभाषा की जाए ,
जो इस देश को भी हथियार बेचता है ,
जो उस देश को भी हथियार बेचता है
और फिर ,
दोनों से कहता है – ”शान्ति से रहना सीखें”
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नन्द कश्यप

Thursday, 20 July 2017

लुटेरों का समूह-गान

लुटेरों का समूह-गान
---- आदित्य कमल
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भाई साहब, आया जाए
मिल- बाँटकर खाया जाए ।
आसन इधर जमाया जाए
बज्र-आसन लगाया जाए
पाचन-शक्ति बढ़ाया जाए
मुख- मुद्रा चमकाया जाए
धंधा-योग पढ़ाया जाए
चल , माया फैलाया जाए
तोंद में हवा फुलाया जाए
कभी साँस सुटकाया जाए
शब्दों को चुभलाया जाए
नथुने को फड़काया जाए
जादूगरी दिखाया जाए
मजमा ज़रा लगाया जाए
धर्म- ध्वजा फहराया जाए
डंका खूब बजाया जाए
ऐसा कीर्तन गाया जाए
सबको नाच नचाया जाए
भाई साहब, आया जाए
मिल - बाँटकर खाया जाए ।
बंदनवार सजाया जाए
भाषण ज़रा जमाया जाए
देश- राग बजवाया जाए
सुर में सुर मिलवाया जाए
फोकना खूब फुलाया जाए
लेमनचूस बंटवाया जाए
राष्ट्र- ध्वज लहराया जाए
खादी- सूट सिलाया जाए
बैंक से लोन उठाया जाए
पब्लिक- मनी उड़ाया जाए
फ़र्ज़ी टीप बनाया जाए
ऑडिट में उलझाया जाए
लाभ- हानि दिखलाया जाए
बैंकरप्ट हो जाया जाए
एयर- टिकट कटाया जाए
और फुर्र उड़ जाया जाए
भाई साहब, आया जाए
मिल- बाँटकर खाया जाए ।
पंजा चलो लड़ाया जाए
भाई , कुछ गरिआया जाए
थुक्कम- थई मचाया जाए
कीचड़ डूब नहाया जाए
मुस्काकर भरमाया जाए
गुर्राकर हड़काया जाए
ऐसा जाल बिछाया जाए
सोचो , कुछ कब्जाया जाए
संसद में चिल्लाया जाए
वोट- बैंक हथियाया जाए
मर्जी का बिल लाया जाए
चल कानून बनाया जाए
जनता को टहलाया जाए
अक्ल में सेंध लगाया जाए
मुद्दों को लटकाया जाए
आपस में भिड़वाया जाए
भाई साहब, आया जाए
मिल- बाँटकर खाया जाए ।
(क्या हम सही में इतने भोले हैं, लुटने को तैयार हैं? या हम और ही तैयारी कर रहे हैं? एक क्रन्तिकारी विचारधारा के साथ एक क्रन्तिकारी दल की? इस व्यवस्था और इसके परजीवी वर्ग को अपदस्त करने की? एक जनवादी राज्य कायम करने की?
समाजवादी भगत सिंह जिंदाबाद!)