Friday, 30 June 2017

जतन ना किया तो सारा देश बेच देंगे

जतन ना किए तो,
तुम्हारे हीं रहबर,
तुम्हारे बदन को
नंगा जला कर,
सरे राह सारा
कफन बेंच देगें!
***
जमीं बेच देगें,
जहाँ बेच देगें,
गंगा की लहरें,
यमन बेंच देगें!
खोये कहाँ हो?
सपनों में गाफिल,
सोये में तेरे,
तुम्हारे ये धर्मों
करम बेंच देगें!
***
मशी बेच देगें ,
कलम बेंच देगे!
गीता, कुरां की,
बचन बेंच देगें!
तुम्हारा हीं बन कर,
तुम्हारे हीं माँझी,
तुम्हारे हीं घर का,
अमन बेंच देगें!
**
शंखों की गूँजों में,
घंटों की कंपन में!
जन्नत की हूरों में,
भटके अगर तो,
वादों के जंगल में!
तेरे भी घर से,
राम औ खुदा की,
लगन बेंच देगें!
कितनी भी भीख मांगो, हमारा OROP नहीं देंगे,
सैनिकों की अस्मत वोट के लिए बेच देंगे!
एयर इंडिया से सारा इंडिया तक बेच देंगे!

(साथी केबी द्वारा)

Saturday, 17 June 2017

कौन हैं राजनीतिज्ञ?

कौन हैं ये?
मालिकों के प्रबंधक?
बड़े पूंजीपतियों के दलाल?
विदेशी पूंजी के दास?
पर कानून बनाते हैं,
महिलाओं के चकला भी चलाते हैं,
दंगा करवाते हैं,
7 सितारा सुविधा और जेड सुरक्षा में रहते हैं,
काले धन और भ्रष्टाचार में पारंगत हैं,
सिपाही, न्यायलय, प्रशाषण साथ में हैं
सेना, मिडिया भी भिन्न नहीं हैं,
फिर भी सारे देश की विकास की बात करते हैं.
जीडीपी के फर्जी आंकड़े से जनता को बेवकूफ बनाते हैं,
सड़क और सोशल मिडिया पर गुंडे पालते हैं,
हमें देश, धर्म, जाति पर बांटते हैं,
क्या बोले, यह भी कंटेंट राईटर ही लिखते हैं,
भीड़ भी इवेंट मैनेजर इकठ्ठा करता है!
यह भडुए है, दलाल हैं,
अपराधी और भ्रष्ट हैं,
ऐयाश हैं!
देश और मेहनतकश आवाम के दुश्मन हैं,
इनकी बिरादरी अलग है,
दुश्मन हैं हमारे,
जल्दी पहचानो, अपनी बर्बादी कम करो,
विद्रोह का नारा दो,
साथी हम एक हैं,
झंडा हमारा लाल है,
क्रांति हमारा रास्ता है,
लक्ष्य हमारा इन मालिकों और उसके चाकरों से मुक्ति है,
इन्सान एक इंसान की तरह जिये,
यही हमारा नारा है!