एनजीओ की राजनीति पर केन्द्रित एक शानदार कविता
लोगों को अज्ञान, अशिक्षा और निर्धनता से मुक्ति दिलाने ।
अद्भुत वक्तृता, लेखन–कौशल और
स्वस्थ–सुदर्शन–सुसंस्कृत भिखमंगे आये
एशिया–अफ्रीका–लातिनी अमेरिका के
जिस तरह पहुंचे वे यानों और
उसी तरह आये वे हमारे बीच ।
भीख, दया, समर्पण और भय की
पुराने मिशनरियों से वे अलग थे,
जैसे कि उनके दाता भी भिन्न थे
अलग थे वे उन सर्वोदयी याचकों से भी
जिनके गांधीवादी जांघिये में
कुछ ने अपने पश्चिमी वैभवशाली दाताओं की महिमा बखानी,
जनक्रान्ति की तैयारी के लिए
क्रान्ति की तैयारियों का भारी बोझ
न पड़े इस देश की गरीब जनता पर
संसाधन जुटाने का नायाब तरीका अपनाया है ।
कि क्रान्ति अभी बहुत दूर है
इसलिए वे तब तक कुछ सुधार ही
दलितों–शोषितों–वंचितों का जीवन
और फीस के तौर पर, बिना नेता–नौकरशाह
खुद भी जुटा लेना चाहते हैं
घर, गाड़ी वगैरह कुछ अदना–सी चीजें
जनता की खातिर इस नर्क जैसे देश में
तो क्या इतना भी चाहना अनुचित है
कि उनके बेटे–बेटी शिक्षा पायें
अशिक्षा ही हमारे दुर्भाग्य का मूल है
अत: वे हमें शिक्षित करने आये हैं,
स्वास्थ्य और परिवार–नियोजन के बारे में
जो ट्रेड–यूनियनें न कर सकीं,
राज्यसत्ता तो चांद मांगना है,
वे हमें चवन्नी–अठन्नी के लिए
नये सिरे से लड़ना सिखायेंगे ।
अत: वे हमें हमारे अधिकारों,
संविधान और श्रम–कानूनों के बारे में
हमें सरकार से क्या मांगना है
तो हम मांगेंगे एक स्वर से
और हमारी याचना के तुमुलनाद
सरकार हमें दे देगी वह सब कुछ
कि यदि सरकार अपनी जिम्मेदारियां
तो हम उसका मुंह क्यों जोहते हैं
यदि वह नौकरियां नहीं देती
तो हम खुद क्यों नहीं कर लेते
और पूंजीपति हमें रोजगार नहीं दे रहे
तो हम स्वयं मिलकर क्यों नहीं
प्रकृति की गोद में निवास करने
भिखमंगों ने बेरोजगार युवाओं से
हम तुम्हें जनता की सेवा करना सिखायेंगे,
पर गुजारा–भत्ता से बेहतर होगा
“रिटायर्ड, निराश, थके हुए क्रान्तिकारियो,
आओ, हम तुम्हें स्वर्ग का रास्ता बतायेंगे ।
आओ तमाम उत्तर मार्क्सवादियो,
उत्तर नारीवादियो वगैरह–वगैरह
आओ, अपने ज्ञान और अनुभव से
एन.जी.ओ. दर्शन के नये–नये शस्त्र और शास्त्र रचो,”
और जुट गये दाता–एजेंसियों के लिए
नई रिपोर्ट तैयार करने में ।
भिखमंगों ने भीख को नई गरिमा दी,
उसे अन्तरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा दी ।
भिखमंगों ने क्रान्ति और बदलाव की
‘पैबन्द और कुर्ते का गीत’ ¹
हम मांगकर लाते रहेंगे तुम्हारे लिए पैबन्द
उन्हें जोड़कर एक दिन तैयार हो जायेगा
भूख से तड़पते हुए मर जाओगे
हम तुम्हारे लिए मांगकर लाते रहेंगे
रोटी के छोटे–छोटे टुकड़े,
एक दिन तुम्हारे पेट में होगी
मत करो बातें सारे कारखाने
मुल्क की हुकूमत पर कब्जे की,
ऐसी कोशिशें असफल हो चुकीं ।”
हम पूछते हैं व्यग्र होकर,
वह तर्जनी उठाकर हमें रोकते हैं,
“हम एक अर्जी लिख रहे हैं ।”
फिर वे एक रिपोर्ट लिखते हैं,
फिर दौरा करने किसी और दिशा में
हम पाते हैं, भिखमंगे नहीं वे
बदलाव के विचारों के, स्वप्नों और आशाओं के ।
शीत की लहर हैं ये भिखमंगे ।
¹ ‘पैबन्द और कुर्ते का गीत’-ब्रेष्ट की प्रसिद्ध कविता का संदर्भ