Monday, 29 July 2019

ज़िंदा रहने को जीवन कहते हैं क्या?

ज़िंदा रहने को जीवन कहते हैं क्या?

समाजवादी भगत सिंह मारे गये,
पर दंगाई, शोषक जीवित है क्या?
अन्याय के खिलाफ विद्रोही मारा गया, 
दलाली कर परजीवी अमर है क्या?
शहीद अमर होने के लिए नहीं मरता,
इंकलाब के लिए है, इतिहास बनाने को नहीं,
थर्राता है शोषक वर्ग, समय उसके पीछे है,
जो खुद ही लिखता रहता है उसका इतिहास!
मुर्ख, तानाशाह लिखवाते अपना इतिहास,
जो बालू के घरौंदे के बराबर भी ना टिकता,
"ज़िंदा" तो कीड़े मकोड़े, गद्दार भी रहते हैं,
पर क्रांतिकारी तो मर कर भी ज़िंदा रहता है!

Thursday, 18 July 2019

विद्रोह

विद्रोह:
उफ़, ना खत्म होते ये जुल्म, ये अंधेरी रात,
बेरोजगारी और भुखमरी, डंडा और लात!
उपर से जुल्म करने वाले ही सत्ता में,
पुलिस, न्याय भी तो उन्हीं के हाथ में!
जायें तो आखिर किसके पास जायें?
कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं बचा है!
क्या विद्रोह करने के लिए भी,
उन्हीं से अनुमति लेना पड़ेगा?