Thursday, 21 April 2016

ओ मजूरा उठ मजूरा बढ़ मजूरा चल मजूरा

ओ मजूरा उठ मजूरा बढ़ मजूरा चल मजूरा
समर-संघर्ष कर मजूरा,क्रांति बिगुल बजा मजूरा।
अब रुको रुको नहीं अब झुको झुको नहीं
एक क्षण की देरी भी युगो का फासला बनेगा
हाँ तू शस्त्र उठा मजूरा क्रांति बिगुल बजा मजूरा।
प्रजातंत्र- लुटेरा का नापाक इरादा ध्वस्त कर
पूंजीवादी सत्ता के मनसूबे को चूर चूर चूर कर
हर चाटुकारों को कुचल क्रांति बिगुल बजा मजूरा।
देखो ठग दाढ़ी बढ़ा धर्मांध है फिराक में
नफरत की जहर-आग को फैला रहा समाज मे
जहरीला धर्मांध कुचल क्रांति बिगुल बजा मजूरा।

Vinay Krishna KaleBadal मजूरा से

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