युद्ध होता है ,
सरकारें नहीं ,सैनिक लड़ते हैं युद्ध ,
राजा नहीं ,प्रजा लडती है युद्ध .
कुछ सैनिक इस देश के मरते हैं ,
कुछ सैनिक उस देश के मरते हैं ,
फिर ,
सुलह होती है ,
समझौता होता है ,
संधि होती है ,
और सब शांत हो जाता है ,
अघटित सा .
…..
लेकिन इतना भर ही नहीं है युद्ध ,
युद्ध बहुत सारे काम करता है ,
युद्ध राजनीति भी करता है ,
युद्ध महंगाई को न्यायोचित ठहराता है ,
युद्ध गड़बड़ाते हुए जनाधार को रोकता है ,
युद्ध गिरती हुई साख को थामता है ,
युद्ध खिसकती हुई कुर्सी को संभालता है ,
युद्ध घोटालों को भुलवा देता है ,
युद्ध जासूसी काण्ड को छुपा देता है ,
युद्ध सुसाइड नोट को दबा देता है ,
युद्ध तड़ीपार को बचा देता है ,
युद्ध ध्यान भटका देता है ,
…..
युद्ध होते नहीं हैं ,
युद्ध निर्मित किये जाते हैं ,
युद्ध गढ़े जाते हैं .
…..
उसके चरित्र की भी परिभाषा की जाए ,
जो इस देश को भी हथियार बेचता है ,
जो उस देश को भी हथियार बेचता है
और फिर ,
दोनों से कहता है – ”शान्ति से रहना सीखें”
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नन्द कश्यप
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