Sunday, 20 May 2018

सिर्फ़ मैं उसे देख सकता हूं: राफा एल मेंदोसा



दक्षिण अमेरिका के एल साल्वादोर देश के प्रसिद्ध कवि राफा एल मेंदोसा की कविता जो हर देश के लिए प्रासंगिक है:

(अनुवाद: पंकज प्रसून)
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बताओ बताओ बताओ

राष्ट्रपति के हाल के दौरे की बात

कि देश के स्थायित्व पर कितना

बढ़िया भाषण दिया था उन्होंने

कि चौबीस घंटे वे और उनके साथी

करते रहते काम और काम

कि पहले वाली से उनकी सरकार किस तरह अलग है

एक चिड़िया बगल से उड़ जाती है

सिर्फ मैं उसे देख सकता हूं

और उसके साथ उड़ सकता हूं

कि पिछले इतवार को किसने खेला था सर्वोत्तम फुटबॉल

चुनाव सभा में कितनी पिचें बनवाने का उनका वादा ना

वर्तमान से अच्छी नयी स्टेडियम के बारे में

पेले की समस्या के बारे में, दूसरे सितारों के बारे में

एक पत्ता गिरता है

मै अकेला उसे देख सकता हूं

और उठा सकता हूं उसे

बताओ, बताओ और बताओ

मिस काफ़ी के बारे में

अगस्त पर्व की रानी के बारे मेंं

मिस यूनिवर्स की अटकलों के बारे में

आर्क स्ट्रीट और दूसरी जगहों की रंडियों के बारे में

उस औरत के बारे में

भोजन के अभाव में

गला घोंट कर मार दिया था अपने बच्चों को करुणा वंश!

एक तितली गुज़र जाती है फड़फड़ाती

सिर्फ मैं उसे देख सकता हूं

उसे बुला सकता हूं

और फूलों को बांट सकता हूं उसके साथ

बताओ, बताओ, दिन भर वे बतियाने रहते हैं

मांस के बारे मे, जिसे वे दे रहे हैं अमरीका को बेच

कॉफी फलियों की दर के बारे में

नयी पनबिजली यो जना के लिए अंतरराष्ट्रीय कर्ज़ के बारे में

राष्ट्रीय लाटरी और उसे जीतने के बारे में

नये बनते होटलों के बारे में

पुलिस को मिली नयी मोटरसाइकिल के बारे में

उन शहरों के बारे में

जिन्हें सर्दियों में नदी बहा कर ले जायेगी

अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेले के बारे में

दस्त होते-होते एक बच्चा गुज़र जाता है

कोई टेपवर्म से

कोई भूख से

कोई अपने भाई के साथ उसकी बाहों में

कोई भीख मांगता

कोई अपने माता-पिता को खोजता

कोई जो मर गया है

हर कोई उन्हें गुज़रते देख सकता है

सिर्फ मैं उन्हें पुकारता हूं

फिर धूल फांकते हैं हम सब साथ

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