विद्रोह:
उफ़, ना खत्म होते ये जुल्म, ये अंधेरी रात,
बेरोजगारी और भुखमरी, डंडा और लात!
उपर से जुल्म करने वाले ही सत्ता में,
पुलिस, न्याय भी तो उन्हीं के हाथ में!
बेरोजगारी और भुखमरी, डंडा और लात!
उपर से जुल्म करने वाले ही सत्ता में,
पुलिस, न्याय भी तो उन्हीं के हाथ में!
जायें तो आखिर किसके पास जायें?
कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं बचा है!
क्या विद्रोह करने के लिए भी,
उन्हीं से अनुमति लेना पड़ेगा?
कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं बचा है!
क्या विद्रोह करने के लिए भी,
उन्हीं से अनुमति लेना पड़ेगा?
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