Wednesday, 4 October 2017

मुनसिफ़ मेरा क़ातिल निकला!

फेस बुक के एक साथी से. खालिद जामा नाम है उनका. गौर फरमाए:                              

सारी उम्र किताबें पढ़ कर इल्म तो हासिल कर डाला |
अमल की दुनिया मे जब हम निकले तो हमसे बेहतर जाहिल निकला ||                                                                          
जब बेगुनाह को फाँसी हो गई तब जा के यह राज़ खुला |
जिस मुनसिफ़ ने सज़ा लिखी थी वह मुनसिफ़ मेरा क़ातिल निकला ||

(मुनसिफ मतलब जज)

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