फेस बुक के एक साथी से. खालिद जामा नाम है उनका. गौर फरमाए:
सारी उम्र किताबें पढ़ कर इल्म तो हासिल कर डाला |
अमल की दुनिया मे जब हम निकले तो हमसे बेहतर जाहिल निकला ||
जब बेगुनाह को फाँसी हो गई तब जा के यह राज़ खुला |
जिस मुनसिफ़ ने सज़ा लिखी थी वह मुनसिफ़ मेरा क़ातिल निकला ||
(मुनसिफ मतलब जज)
सारी उम्र किताबें पढ़ कर इल्म तो हासिल कर डाला |
अमल की दुनिया मे जब हम निकले तो हमसे बेहतर जाहिल निकला ||
जब बेगुनाह को फाँसी हो गई तब जा के यह राज़ खुला |
जिस मुनसिफ़ ने सज़ा लिखी थी वह मुनसिफ़ मेरा क़ातिल निकला ||
(मुनसिफ मतलब जज)
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