बाज़ार जल रहा है,
मुनाफा घट रहा है.
सामान सड रहा है,
खरीददार लुट रहे हैं.
पूंजी के चाकर, मैनेजर बेचैन हैं,
अर्थशास्त्री उपाय ढूंड रहे हैं,
अँधेरा है, भूख है, मौत है,
पर कौन मर रहा है?
माल है, अनाज है,
बहुत है पर घुन खा रहे है,
और मेहनतकश मर रहे हैं,
धन पैदा करने वाले ही मर रहे हैं.
फैक्टरी बंद हो रहे हैं,
रोजगार ख़त्म हो रहे हैं,
पैसे पर दल्ले नाच रहे हैं,
मिडिया को "विकास" नजर आ रहा है.
बाज़ार जल रहा है,
पर कौन मर रहा है.
बाल मजदूर मर रहा है,
ठेलेवाले, किसान मर रहे हैं.
नोटबंदी और और जीएसटी आ चूका है,
बड़े पूंजीपति, वित्त मालिक
और "राजकुमार" आबाद हो रहे हैं,
छोटे, मझौले व्यापारी बर्बाद हो रहे हैं!
बाज़ार जल रहा है,
पर पूंजी का विकास हो रहा है,
कौन मर रहा है,
मेहनतकश मर रहा है!
उठो, अभी मरने का वक्त नहीं,
मारनेवालों को मारो!
क्रांति का बिगुल बज चूका है,
दुश्मनों के कब्र खोदो!
अब और नहीं, अब बिलकुल नहीं,
आज नहीं तो कभी नहीं,
हत्यारों को ख़त्म करो,
सत्ता से बेदखल करो!
इतिहास बनाने वाले हो,
इतिहास बदल डालो,
बाज़ार को जला डालो,
खुद की सत्ता बना डालो!
मुनाफा घट रहा है.
सामान सड रहा है,
खरीददार लुट रहे हैं.
पूंजी के चाकर, मैनेजर बेचैन हैं,
अर्थशास्त्री उपाय ढूंड रहे हैं,
अँधेरा है, भूख है, मौत है,
पर कौन मर रहा है?
माल है, अनाज है,
बहुत है पर घुन खा रहे है,
और मेहनतकश मर रहे हैं,
धन पैदा करने वाले ही मर रहे हैं.
फैक्टरी बंद हो रहे हैं,
रोजगार ख़त्म हो रहे हैं,
पैसे पर दल्ले नाच रहे हैं,
मिडिया को "विकास" नजर आ रहा है.
बाज़ार जल रहा है,
पर कौन मर रहा है.
बाल मजदूर मर रहा है,
ठेलेवाले, किसान मर रहे हैं.
नोटबंदी और और जीएसटी आ चूका है,
बड़े पूंजीपति, वित्त मालिक
और "राजकुमार" आबाद हो रहे हैं,
छोटे, मझौले व्यापारी बर्बाद हो रहे हैं!
बाज़ार जल रहा है,
पर पूंजी का विकास हो रहा है,
कौन मर रहा है,
मेहनतकश मर रहा है!
उठो, अभी मरने का वक्त नहीं,
मारनेवालों को मारो!
क्रांति का बिगुल बज चूका है,
दुश्मनों के कब्र खोदो!
अब और नहीं, अब बिलकुल नहीं,
आज नहीं तो कभी नहीं,
हत्यारों को ख़त्म करो,
सत्ता से बेदखल करो!
इतिहास बनाने वाले हो,
इतिहास बदल डालो,
बाज़ार को जला डालो,
खुद की सत्ता बना डालो!
No comments:
Post a Comment