Friday, 30 June 2017

जतन ना किया तो सारा देश बेच देंगे

जतन ना किए तो,
तुम्हारे हीं रहबर,
तुम्हारे बदन को
नंगा जला कर,
सरे राह सारा
कफन बेंच देगें!
***
जमीं बेच देगें,
जहाँ बेच देगें,
गंगा की लहरें,
यमन बेंच देगें!
खोये कहाँ हो?
सपनों में गाफिल,
सोये में तेरे,
तुम्हारे ये धर्मों
करम बेंच देगें!
***
मशी बेच देगें ,
कलम बेंच देगे!
गीता, कुरां की,
बचन बेंच देगें!
तुम्हारा हीं बन कर,
तुम्हारे हीं माँझी,
तुम्हारे हीं घर का,
अमन बेंच देगें!
**
शंखों की गूँजों में,
घंटों की कंपन में!
जन्नत की हूरों में,
भटके अगर तो,
वादों के जंगल में!
तेरे भी घर से,
राम औ खुदा की,
लगन बेंच देगें!
कितनी भी भीख मांगो, हमारा OROP नहीं देंगे,
सैनिकों की अस्मत वोट के लिए बेच देंगे!
एयर इंडिया से सारा इंडिया तक बेच देंगे!

(साथी केबी द्वारा)

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