हम और भगवान
हमारे पूर्वजों ने तुम्हें बनाया
और तू हमारा मालिक बन गया,
तेरे ठेकेदार चूस रहे खून हमारा
तेरी ही रक्षा के नाम पर!!
कितने कमजोर थे पूर्वज हमारे
अज्ञान, अंधविश्वासी, बेघर, बेचारे
पर हम तो उनसे भी गये गुजरे
आपस में ही मर कट जल मरे।
क्या कोई रास्ता नहीं है,
मुक्ति का, जिंदगी पाने का
जिने का, इंसान बनने का,
सिवाय इंकलाब का?
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