मेरे नाम, जाति और धर्म को लेकर कुछ लोगो को जिज्ञासा रहती है.
बता देता हूँ, मेरा धर्म और जाति वही है ,
जिससे तुम नफरत करते हो ।
जब तुम भंगी से नफरत करते हो,
तो मुझे लगता है मै भंगी हूँ,
जब तुम चमार नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मै चमार हूँ,
जब तुम जाट से नफरत करते हो तो,
मुझे लगता है मैं जाट हूं ,
जब तुम मुस्लिम से नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मै मुस्लिम हूँ,
जब तुम हिन्दू से नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मैं हिन्दू हूं, ।
जब तुम सरदारों से नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मैं सरदार हूं ।
जब तुम ईसाई से नफरत करते हो तो,
मुझे लगता है मैं ईसाई हूँ..
जब तुम किसान से नफरत करते हो तो,
मुझे लगता है मैं किसान हूं ।
तुम आरक्षण से नफरत करते हो तो ,
मै आरक्षित हूँ, तुम अशिक्षितों से नफरत करते हो तो मै अशिक्षित हूँ ....
मै हर वो इंसान हूँ जिससे तुमको नफरत है, जिसे तुम मिटाना चाहते हो या जिसको डराकर या दबाकर उसका शोषण करना चाहते हो।
मै इंसान हूँ, उसी से तो तुमको सबसे ज्यादा नफरत है ना।
बता देता हूँ, मेरा धर्म और जाति वही है ,
जिससे तुम नफरत करते हो ।
जब तुम भंगी से नफरत करते हो,
तो मुझे लगता है मै भंगी हूँ,
जब तुम चमार नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मै चमार हूँ,
जब तुम जाट से नफरत करते हो तो,
मुझे लगता है मैं जाट हूं ,
जब तुम मुस्लिम से नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मै मुस्लिम हूँ,
जब तुम हिन्दू से नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मैं हिन्दू हूं, ।
जब तुम सरदारों से नफरत करते हो तो ,
मुझे लगता है मैं सरदार हूं ।
जब तुम ईसाई से नफरत करते हो तो,
मुझे लगता है मैं ईसाई हूँ..
जब तुम किसान से नफरत करते हो तो,
मुझे लगता है मैं किसान हूं ।
तुम आरक्षण से नफरत करते हो तो ,
मै आरक्षित हूँ, तुम अशिक्षितों से नफरत करते हो तो मै अशिक्षित हूँ ....
मै हर वो इंसान हूँ जिससे तुमको नफरत है, जिसे तुम मिटाना चाहते हो या जिसको डराकर या दबाकर उसका शोषण करना चाहते हो।
मै इंसान हूँ, उसी से तो तुमको सबसे ज्यादा नफरत है ना।
यह एक बेहतरीन कविता है लेकिन इसके कवि का नाम क्या है बताने का कष्ट करें
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