धरती के चप्पे-चप्पे को बाज़ार बनाती है
हर संबंधों को सिक्कों का व्यापार बनाती है
बस्ती-बस्ती में ज़हरीली दीवार बनाती है
आबादी का जीना-मरना दुश्वार बनाती है
यह कैसी डायन बैठी है दुनिया की छाती पर
जो पाठ शांति का करते हुए हथियार बनाती है
--------आदित्य कमल
हर संबंधों को सिक्कों का व्यापार बनाती है
बस्ती-बस्ती में ज़हरीली दीवार बनाती है
आबादी का जीना-मरना दुश्वार बनाती है
यह कैसी डायन बैठी है दुनिया की छाती पर
जो पाठ शांति का करते हुए हथियार बनाती है
--------आदित्य कमल
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