Sunday, 28 April 2019

चुनाव और क्रांतिकारी अवसर

काफी अवसर था, हमारे लिए इस चुनाव में, 
कुछ कर गुजरने को, कुछ कर दिखाने को!!
चुनाव में "चुनाव" का ही तो इस्तेमाल करना था, 
चुनाव को मजाक बनाने वाले को तो दिखाना था!
इन्हें चुनाव से नहीं, समाजवादी क्रांति से हराना था,
चुनाव उनका दिखावा था, हमारे लिए भी बहाना था!
पर हम एक हो ना सके, कांग्रेस-भाजपा में रह गये,
मारना तो दुश्मन को था, पर आपस में कट मर गये!
दुश्मनों की अंतिम जीत और हमारी श्रद्धांजली है?
पर भविष्य हमारा है, हमने इतिहास से सीख ली है!
दोस्त, यह "हार" हार नहीं, सिर्फ एक पड़ाव था,
उठो तुम, रुको भी, ले लो एक दम, ठहराव था!
लड़ाई अभी बाकी है, जीत तुम्हारी है, बढ़े चलो,
क्रांति की ललकार है, हम सब एक हैं, बढ़े चलो!
सुधार नहीं, क्रांति चाहिए, भीख नहीं, अधिकार लेंगे!
अब तुमसे "विकास" नहीं, छुटकारा लेकर ही रहेंगे!!
खुद के हाथों में अधिकार चाहिए!
पूंजीवाद नहीं, समाजवाद चाहिए!

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