Friday, 31 May 2019

जिंदगी बेमानी था पर:

कुछ भी नहीं किया जिंदगी में,
सिवाय खाया पिया और मौज किया,
कभी गजालत की जिंदगी, तो कभी रोया!
तभी मिला एक किताब था,
"कम्यूनिस्ट मैनीफेस्टो" नाम था,
और तब जिंदगी ने जबर्दस्त पलटी लिया!
इस अधेड़ उम्र में नयी दिशा दी,
मजदूर होने का अहसास करवाया,
और मुझे एक क्रान्तिकारी कम्युनिस्ट बनाया!

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