युद्ध किसके लिए और फिर किस के काम की?
सेना किस के लिए, देश या देश के मालिक की?
मरते सिपाही, मुनाफा कमाता हथियार विक्रेता,
टैक्स भरती जनता, धनी होता पूंजीपति व नेता!
सेना किस के लिए, देश या देश के मालिक की?
मरते सिपाही, मुनाफा कमाता हथियार विक्रेता,
टैक्स भरती जनता, धनी होता पूंजीपति व नेता!
और ये सारे बहादुर सिपाही पैदा होता हैे कहाँ?
हमारे ही परिवार में पैदा हुआ, मरेगा भी यहां!
वक्त है सोचने का, कौन करता है युद्ध पैदा?
कौन बनाता आतंकी और कौन है पैसा देता?
हमारे ही परिवार में पैदा हुआ, मरेगा भी यहां!
वक्त है सोचने का, कौन करता है युद्ध पैदा?
कौन बनाता आतंकी और कौन है पैसा देता?
आखिर क्यूँ सारी दुनिया में माहौल है युद्ध का,
और हर रोज मर रहे सैकड़ों सैनिक, जनता!!
तालियाँ बजाते लोग पर विलखती माँ, विधवाएं,
फूल माला डालते जेनरल व राजनैतिक भडुए!
और हर रोज मर रहे सैकड़ों सैनिक, जनता!!
तालियाँ बजाते लोग पर विलखती माँ, विधवाएं,
फूल माला डालते जेनरल व राजनैतिक भडुए!
मुनाफा बढ़ाते और अगले युद्ध की प्लानिंग करते,
मजदूर, किसान, सैनिक के खून से होली खेलते!!
गिद्ध, चील और सेना के "मालिक" जश्न मनाते,
हाय रे इन्सान, तुम्हारे ही मौत पे मजा करते!!
मजदूर, किसान, सैनिक के खून से होली खेलते!!
गिद्ध, चील और सेना के "मालिक" जश्न मनाते,
हाय रे इन्सान, तुम्हारे ही मौत पे मजा करते!!
गीदड़, लोमड़ी और सियार निकले लाश लूटने,
मौत के सौदागर के पीछे चल पड़े तुम रोटी लेने!
उन्हीं के पीछे हो लिए, पैसों के चाँद टुकड़ों के लिए,
अब तो बोल, नहीं लड़ेंगे युद्ध, लड़ेंगे शांति के लिए!
मौत के सौदागर के पीछे चल पड़े तुम रोटी लेने!
उन्हीं के पीछे हो लिए, पैसों के चाँद टुकड़ों के लिए,
अब तो बोल, नहीं लड़ेंगे युद्ध, लड़ेंगे शांति के लिए!
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