क्रांति की गूंज लोक सभा, विधान सभा में नहीं,
गलियों में सुनाई देती है!
न्यायलय में नहीं, जहाँ मरते प्रजातंत्र की सिसकियाँ ही सुनाई देती हैं,
वहां जहाँ जिंदादिल मजदुर खटते हैं रात दिन, किसी के मुनाफे के लिए!
पुलिस चौकी में नहीं, जहाँ किसानो से लिखवाया जाता है पट्टा,
टाटा, अम्बानी को जमीं दिलवाने के लिए, मुनाफे के लिए,
खेतों, खलिहानों में जहाँ वह मरते हैं जिन्दा रहने के लिए,
और बैंकों और साहूकारों के कर्ज चुकाने के लिए!
7 सितारा होटल में नहीं, जहाँ विश्व भर के पूंजीपति मिलते हैं, मुनाफे में बटवारे के लिए,
बल्कि जेल में जहाँ, क्रन्तिकारी बंद हैं वर्षों से, बिना मामला खुले हुए!
क्रांति वहां नहीं पनपती है, जहाँ दिन रात षडयंत्र होता है,
धर्म, जाति, पूंजी के ठेकेदारों द्वारा,
बल्कि वहां जहाँ दिल में बसते है भगत सिंह,
जहाँ अन्याय और शोषण के खिलाफ पैदा होते हैं नए क्रांति वीर!
मजदुर एकता जिंदाबाद! क्रन्ति जिंदाबाद!
गलियों में सुनाई देती है!
न्यायलय में नहीं, जहाँ मरते प्रजातंत्र की सिसकियाँ ही सुनाई देती हैं,
वहां जहाँ जिंदादिल मजदुर खटते हैं रात दिन, किसी के मुनाफे के लिए!
पुलिस चौकी में नहीं, जहाँ किसानो से लिखवाया जाता है पट्टा,
टाटा, अम्बानी को जमीं दिलवाने के लिए, मुनाफे के लिए,
खेतों, खलिहानों में जहाँ वह मरते हैं जिन्दा रहने के लिए,
और बैंकों और साहूकारों के कर्ज चुकाने के लिए!
7 सितारा होटल में नहीं, जहाँ विश्व भर के पूंजीपति मिलते हैं, मुनाफे में बटवारे के लिए,
बल्कि जेल में जहाँ, क्रन्तिकारी बंद हैं वर्षों से, बिना मामला खुले हुए!
क्रांति वहां नहीं पनपती है, जहाँ दिन रात षडयंत्र होता है,
धर्म, जाति, पूंजी के ठेकेदारों द्वारा,
बल्कि वहां जहाँ दिल में बसते है भगत सिंह,
जहाँ अन्याय और शोषण के खिलाफ पैदा होते हैं नए क्रांति वीर!
मजदुर एकता जिंदाबाद! क्रन्ति जिंदाबाद!
No comments:
Post a Comment