Tuesday, 31 May 2016

नेता और सुअर

संजीबा की कविता........." नेता और सुअर "
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मुझे इन नेताओं से अच्छे
सुअर के बच्चे लगे,
जो कम से कम रोजाना
मेरी गली तो घूम जाते हैं,
और अपने स्तर से
गंदगी खाकर
साफ तो कर जाते हैं,
लेकिन
वो कम्बख़्त आएगा
सिर्फ चुनाव के वक़्त
बस - वोट माँगने
और ये सफाई देने
कि - मैं सुअर से अच्छा हूँ
और कुछ नहीं....................
मेरी टिपण्णी: हम खुद सत्ता अपने हाथ में क्यूँ न ले लें?

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