'सियासी अनपढ़ सबसे बदतर अनपढ़ होता है, वह सियासी मामलों में ना हिस्सा लेता है, ना उनके बारे में कुछ बोलता-सुनता है। उसको मालूम नहीं कि जिंदगी का पूरा ख़र्च, सब्जी, मछली, आटे, जूतों, दवाई की कीमत, मकान भाड़ा, सब सियासी फैसलों से तय होता है। हद दर्जे का बेवकूफ सियासी अनपढ़ घमंड से छाती फुलाकर कहता है कि वह राजनीति से नफ़रत करता है। उस अहमक को मालूम ही नहीं कि उसकी राजनीतिक मूढ़ता की पैदावार हैं - कोई वेश्या, अनाथ बच्चा तथा चोट्टों में भी सबसे बदतर - भ्रष्ट और देशी-विदेशी कंपनियों के चाकर घटिया नेता।'
- Bertolt Brecht
- Bertolt Brecht
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