Naresh Saigal
(इंसान को धर्म और जाति का ठेकेदार बनता तंत्र!)
तंत्र के सामने विवश गण
अजगर जितना विशाल तंत्र
कुंडली में गण को कसता तंत्र
अज़दहे को मात देता तंत्र
उफनता, बलबलाता तंत्र
खुशियों के पोस्टर दिखाता तंत्र
गरीब के निवाले छीनता तंत्र
आमजन को बेबस बनाता तंत्र
मोटे को और मुटवाता तंत्र
जसके लिए, जिसके नाम पर बना था
उस जन को झुठलाता तंत्र
मन्त्र से भी काबू में न आये
बेकाबू , सबसे ऊपर तंत्र
गण नीचे , ऊपर तंत्र
अपना लोकतंत्र, अपना गणतंत्र।
अजगर जितना विशाल तंत्र
कुंडली में गण को कसता तंत्र
अज़दहे को मात देता तंत्र
उफनता, बलबलाता तंत्र
खुशियों के पोस्टर दिखाता तंत्र
गरीब के निवाले छीनता तंत्र
आमजन को बेबस बनाता तंत्र
मोटे को और मुटवाता तंत्र
जसके लिए, जिसके नाम पर बना था
उस जन को झुठलाता तंत्र
मन्त्र से भी काबू में न आये
बेकाबू , सबसे ऊपर तंत्र
गण नीचे , ऊपर तंत्र
अपना लोकतंत्र, अपना गणतंत्र।
(इंसान को धर्म और जाति का ठेकेदार बनता तंत्र!)
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