Thursday, 26 January 2017

तंत्र की सत्ता!

Naresh Saigal

तंत्र के सामने विवश गण
अजगर जितना विशाल तंत्र
कुंडली में गण को कसता तंत्र
अज़दहे को मात देता तंत्र
उफनता, बलबलाता तंत्र
खुशियों के पोस्टर दिखाता तंत्र
गरीब के निवाले छीनता तंत्र
आमजन को बेबस बनाता तंत्र
मोटे को और मुटवाता तंत्र
जसके लिए, जिसके नाम पर बना था
उस जन को झुठलाता तंत्र
मन्त्र से भी काबू में न आये
बेकाबू , सबसे ऊपर तंत्र
गण नीचे , ऊपर तंत्र
अपना लोकतंत्र, अपना गणतंत्र।

(इंसान को धर्म और जाति का ठेकेदार बनता तंत्र!)

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