तू किस अधिकार से चरखे से फोटो जोड़ आया था !!
वो बैरिस्टर बड़े घर का सभी कुछ छोड़ आया था !!
वो बैरिस्टर बड़े घर का सभी कुछ छोड़ आया था !!
कभी कुर्ता तेरा मैला, और अब है, सूट लाखों का !!
वो धोती बांध कर रूह-ए-वतन झकझोड़ आया था !!
वो धोती बांध कर रूह-ए-वतन झकझोड़ आया था !!
गरीबों के लहू से हाथ रंगे हैं तेरे अब तक !!
अहिंसक रहके वो फौज-ए-फिरंगी मोड़ आया था !!
अहिंसक रहके वो फौज-ए-फिरंगी मोड़ आया था !!
तेरी सियासत की रोटी सिकती है दंगे भड़कने पर
वो दंगे रोकने को रोटी पानी छोड़ आया था !!
वो दंगे रोकने को रोटी पानी छोड़ आया था !!
तेरी बातों से सदियों से बने रिश्ते टूट रहे हैं
वोह गंगा और जमुना के किनारे जोड़ आया था
वोह गंगा और जमुना के किनारे जोड़ आया था
( Salauddin Meer )
( Sobhakar Sharma ki wall se )
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