Saturday, 14 January 2017

तू किस अधिकार से चरखे से फोटो जोड़ आया था

तू किस अधिकार से चरखे से फोटो जोड़ आया था !!
वो बैरिस्टर बड़े घर का सभी कुछ छोड़ आया था !!
कभी कुर्ता तेरा मैला, और अब है, सूट लाखों का !!
वो धोती बांध कर रूह-ए-वतन झकझोड़ आया था !!
गरीबों के लहू से हाथ रंगे हैं तेरे अब तक !!
अहिंसक रहके वो फौज-ए-फिरंगी मोड़ आया था !!
तेरी सियासत की रोटी सिकती है दंगे भड़कने पर
वो दंगे रोकने को रोटी पानी छोड़ आया था !!
तेरी बातों से सदियों से बने रिश्ते टूट रहे हैं
वोह गंगा और जमुना के किनारे जोड़ आया था

( Salauddin Meer )
( Sobhakar Sharma ki wall se )

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