समाज-देश का दुश्मन कौन?
हम मुर्ख, गंवार और जाहिल,
या बड़े पदों पर बैठे काहिल?
हम "भ्रष्ट-अपराधी" जिन्हें किया अंदर,
या खरबों के वो मालिक, जो हैं बाहर?
या बड़े पदों पर बैठे काहिल?
हम "भ्रष्ट-अपराधी" जिन्हें किया अंदर,
या खरबों के वो मालिक, जो हैं बाहर?
सरकार, पुलिस और प्रशासन उनके,
सेना, न्यायालय व कारखाना उनके!
मजदूर और किसानों का श्रम उनका,
पैदावार और उपर से मुनाफा उनका,
पर क्या अपराधी होना सिर्फ हमारा?
सेना, न्यायालय व कारखाना उनके!
मजदूर और किसानों का श्रम उनका,
पैदावार और उपर से मुनाफा उनका,
पर क्या अपराधी होना सिर्फ हमारा?
अगर विद्रोह करें तो डंडा गोली उनकी,
पर छाती हमारी, मरे बच्चे बीबी हमारी,
नहीं मानेंगे अब हुकूमत, न्याय तुम्हारी!
करोड़ों हम, लेंगे सत्ता खुद के हाथों में,
अपना श्रम और उत्पाद अपने हाथों में!
पर छाती हमारी, मरे बच्चे बीबी हमारी,
नहीं मानेंगे अब हुकूमत, न्याय तुम्हारी!
करोड़ों हम, लेंगे सत्ता खुद के हाथों में,
अपना श्रम और उत्पाद अपने हाथों में!
अब हम नहीं, तुम सारे होगे जेल में!
सिखोगे अब श्रम की महत्ता अंदर में!
साथियों, कोई दूसरा विकल्प नहीं है!
नारा दो हम एक हैं, एक हैं, एक हैं!!
सिखोगे अब श्रम की महत्ता अंदर में!
साथियों, कोई दूसरा विकल्प नहीं है!
नारा दो हम एक हैं, एक हैं, एक हैं!!
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