ना तो मैं ज़िंदा हूं, ना ही कोई लाश,
ढांचे में हाड़ तो है, पर नहीं है मांस!
जी, लोग तो मुझे इंसान ही कहते हैं,
पर बच्चे मुझे कार्टून ही समझते हैं!!
ना ही मैं जवान हूं, ना ही हुआ हूँ बूढ़ा,
देखी है सिर्फ 35-36 गर्मी और जाड़ा!
ना मैं कोई हिन्दू हूं, ना ही कोई मुसलमान,
ना ही मैं कोई दलित हूं ना ही कोई बाम्हन!
जी हाँ, मनुष्य योनी में ही तो जन्म लिया था,
पर इंसान नहीं, बना सिर्फ एक मजदूर था!
पूंजीवादी शोषण का हूं सिर्फ एक नमूना,
चूस लिया जिसने मेरा खून और पसीना!
बचाना है गर मेहनतकश, मानवता, धरती को,
ध्वस्त करो पूंजीवाद, दफन करो पूंजीवाद को!
ढांचे में हाड़ तो है, पर नहीं है मांस!
जी, लोग तो मुझे इंसान ही कहते हैं,
पर बच्चे मुझे कार्टून ही समझते हैं!!
ना ही मैं जवान हूं, ना ही हुआ हूँ बूढ़ा,
देखी है सिर्फ 35-36 गर्मी और जाड़ा!
ना मैं कोई हिन्दू हूं, ना ही कोई मुसलमान,
ना ही मैं कोई दलित हूं ना ही कोई बाम्हन!
जी हाँ, मनुष्य योनी में ही तो जन्म लिया था,
पर इंसान नहीं, बना सिर्फ एक मजदूर था!
पूंजीवादी शोषण का हूं सिर्फ एक नमूना,
चूस लिया जिसने मेरा खून और पसीना!
बचाना है गर मेहनतकश, मानवता, धरती को,
ध्वस्त करो पूंजीवाद, दफन करो पूंजीवाद को!
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