Friday, 15 February 2019

मजदूर महिला का हल्ला बोल

खपड़ैल स्कूल से बाहर गयी नहीं,
पांच-सात के आगे कभी पढ़ी नहीं,
अंग्रेजी छोड़़ो, हिंदी बोल पाती नहीं,
भरपेट खाना, नये कपड़े पाती नहीं!
पर मेहनत कर खाती, बच्चों को पालती,
पति भी साथ है, सपने भी जरूर देखती,
ऐसा समय आयेगा, बच्चे बड़े स्कूल जायेंगे,
काम करेंगे, इज्जत भरी जिंदगी भी जियेंगे!
पर कैसे, यह उसके समझ से परे था,
पति श्रमजीवी, पर वह भी बिचारा था,
बच्चों के हाथ में दिखा एक सहारा था,
हाथों में एक लाल झंडा लहरा रहा था!

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