एक जोड़े से मिला वे दोनों अधेड़ हैं
बच्चे सेटल्ड और खुद चिंता मुक्त हैं
कभी कभी बाहर भी खाना खाते हैं
हजार बारह सौ खर्च कर ही देते हैं।
बाजार भी जाते हैं, शौपिंग कर लेते हैं
कभी-कभी गहने तक भी खरीद लेते हैं
देश और आर्थिक मंदी की चिंता नहीं है
दरिया दिल, मस्त हैं, जीवन चल रहा है।
पर कामगारों, ठेलेवालौं को न भाव देते
भिखारियों को समाज पर बोझ समझते
खुद भगवान, अल्लाह, गौड के खास हैं
बाकि को देखते जैसे समाज पे बोझ हैं।
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