Saturday, 19 September 2020

उठे हैं करोड़ों क्रांतिकारी

उठे हैं करोड़ों क्रांतिकारी

अच्छा हिन्दू या सिख हो सकता है
मुसलमान या ईसाई  हो सकता है,
जैन, बुद्ध और बहाई हो सकता है
पर खालिस इंसान बनना कठिन है।

एक अच्छा इंसान जाति धर्म से परे है
21 वीं शताब्दी है विज्ञान और तर्क है,
उसे नास्तिक भगत सिंह  बनना होगा
समाजवाद, क्रांति भी  सिखना होगा।

नया जमाना, नया समय नयी सोच है
युवा पीढ़ी नया जोश, उफान उठा है,
मजदूर, किसानों और क्षात्रों में रोष है
उठे हैं करोड़ों क्रांतिकारी दावानल है।

No comments:

Post a Comment