कुंठित मन
70% के साथ स्नातक डिग्री ली थी
चोरी नहीं, मिहनत से पढ़ाई की थी
रट्टा भी मारा था और समझा भी था
आज नहीं, वह कल का जीवन था।
धर्म पर युद्ध है, जातीय संस्कृति है
गॉड को बचाना है, देश पे लड़ना है
इंसान का क्या, खाना तक नहीं है
मुर्त को मारो, मुर्ती पीछे भागना है।
अजीब कश्मकश है, घोर अंधेर है
अज्ञान, व अंधविश्वास का जोर है
विज्ञान पढ़ा किसी काम का नहीं है
जो पढ़ा नहीं कभी सर पे सवार है।
फासीवादी सत्ता, नंगा नाच रहा है
भारी बेगारी कुंठित मन लाचारी है
मजदूर, किसान, युवा बदहवास है
प्रजातंत्र पस्त है फासीवाद मस्त है।
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