Thursday, 29 October 2020

क्यों करें इज्जत औरतों की

 क्यों करें इज्जत औरतों की

नहीं पूजा करता औरतों के लिए
ना ही लड़ता हूं उनके नाम के लिए
मजदूर हैं गर वो, बराबर हों पुरूषों के
हां लड़ता हूं, शोषण के खिलाफ उनके।
औरत एक इंसान है, मजदूर है
पर न देवी है, न ही कोई शक्ति है
न तो वो दासी है, न ही वो मजबूर है
न ही पुरूषों के लिए सेक्स खिलौना है।
निजी सम्पत्ति ने घर में बंद किया
दासता और सामंती ने रखैल बनाया
पूंजी ने माल बना उसे बाजार में ला दिया
खरीद बिक्री का टैग लगा माल बना दिया।
बाजारू नहीं, इंसान बनने दो
देवी नहीं, पर मुंह छुपाना भी नहीं
औरतों की इज्जत घूंघट से हर्गीज नहीं
बराबरी और काम का अधिकार दो जीने दो।

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