कहां आ गये हम?
होमोसेपियंस से मानव तक के सफर में
श्रम आधार था, चार से दो पैर पे खड़े होने में
अफ्रीका से अमरीका, युरोप, एशिया तक आने में
पर सिसक रहा है खुद के बनाए पूंजी के निर्मम पैरों में।
क्या अंत है श्रम के सफर की
2-3 लाख वर्षों के भागम भाग की
अनंत समय की दासता, पूंजी की गुलामी में
या बाकि है श्रम और पूंजी के लड़ाई की कहानी में?
श्रम की लड़ाई, यानी श्रमिक की
पूंजी की लड़ाई, यानी पूंजीपति की
अंतिम लड़ाई बाकी है, कहानी अधुरा है
पूंजी का दफन, श्रम के जीत का जश्न बाकी है।
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