Wednesday, 7 October 2020

जीवित या मृत, हलचल नहीं

 जीवित या मृत, हलचल नहीं

खबरें सब मालूम है उसे,
वाकिफ है वह हर खबर से!
जनता की उठती हर कराहों से
बच्चियों पर बढ़ते बलात्कारों से।
खत्म हो रही जिंदगानियों से
चित्कारती कराहती महिलाओं से।
चेहरा विहीन पुलिस की दरिंदगियों से
लिजलिजे प्रशासन के हर क्रूर अट्ठाहस से।
सब सामान्य है उसके लिए
और उसके चापलूसों के लिए।
वह बड़ी बातें करता है परलोक की
पर लूट-खसोटता रहा है इस लोक की।
जनता नादान नहीं, ना ही थी कभी
फिर क्यों मुर्दा घर सी है शांति अभी।
तुम जीवित हो या मृत, हलचल भी नहीं
किसी भी जाने अनजाने लाश से कम नहीं!

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