Thursday, 29 October 2020

गर मिल जाये जिंदगी दुबारा

 गर मिल जाये जिंदगी दुबारा

याद है जहां तक वहीं से जीना चाहता हूं
बड़ी नहीं, छोटी मोटी गलतियाँ सुधार सकूं
बड़ा हो गया खास अनुभवी अब तो हो गया हूं
नयी जिंदगी, नये तरीके, नयेपन से अब जी सकूं।
मारा था छोटे भाई को, मारूं ना दुबारा
टिफिन बाद ही भागा जाता था स्कूल से
अब तो जाऊं ही ना स्कूल में कभी शुरू ही से
पास ही ना फटकूं उस सहपाठी के, जिसने था मारा।
जवानी में चक्कर लगाये थे, बनने को नौकर
भटका सारा जहां, इंटरव्यू दिये, हूये सारे बेकार
शादी की उनका सुंदर मुस्कान और मुखड़ा देख कर
इस बार ना ही शादी करूं ना ही बनुं किसी का चाकर।
भले ही भगत सिंह ना कभी बन पाऊं
पर केवल क्रांति का रास्ता ही मैं अपनाउं
पर सब को पता है, ख्याली पुलाव है यह सब
यहीं से आगे बढ़ानी है, अपनी जिंदगानी अब।

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